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अब अगर प्रोजेक्ट में हुई देरी तो बिल्डरों को देना पड़ सकता है 11% ब्याज

October 21, 2016 | By

घर खरीदने पर प्रोजेक्ट में देरी की वजह से बढ़ती लोन लायबिलिटीज के बोझ तले दबने वालों को राहत देने के लिए कानूना का नया मसौदा तैयार किया गया है। इसके तहत अगर अपार्टमेंट्स या घर उनके खरीदारों को हैंड आवेर करने में देरी हुई तो डेवलपरों को उन्हें 11.2 प्रतिशत ब्याज देना पड़ सकता है।

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नए कानून में यह भी कहा गया है कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट रहित प्रोजेक्ट रियल स्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी में रजिस्टर होंगे जो नया कानून नोटिफाइड होने के तीन महीने के अंदर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित होने हैं। ड्राफ्ट रूल्स में यह भी कहा गया है कि बिल्डरों को प्रोजेक्ट के पूरा होने की तारीख, फ्लैट की साइज और उनमें जो सुविधाएं दिए जाने के वादे किए गए, उन सबकी जानकारी देनी होगी। ड्राफ्ट रूल्स पर 8 जुलाई तक आम लोगों की राय मांगी गई है।

आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने रियल एस्टेट रूल्स का मसौदा रियल एस्टेट (डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशन) एक्ट, 2016 के 1 मई से लागू होने के महज दो महीने के अंदर ही तैयार कर दिया है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के प्राइम लेंडिंग रेट (पीएलआर) या उससे ज्यादा पर दो परेसेंट पॉइंट्स इंट्रेस्ट रेट कॉम्पेनसेशन का प्रस्ताव किया गया है। सामान्यत: एसबीआई को होमलोन एमसीएलआर (मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंडबेस्ड लेंडिंग रेट) या उससे ज्यादा पर 0.20 से 0.80 प्रतिशत पॉइंट्स का होता है। इसका मतलब यह है कि 9.35 प्रतिशत से 9.95 प्रतिशत के होम लोन के मददेनजर कॉम्पेनसेशन रेट 11.2 पर्सेंट होगा।

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