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गुड़गांव के प्रॉजेक्ट में घर खरीदार को ‌‌‌17 करोड़ लौटाए यूनिटेक: सुप्रीम कोर्ट

October 20, 2016 | By

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रीयल्टी डिवेलपर यूनिटेक को आदेश दिया कि वह गुड़गांव के अपने प्रॉजेक्ट विस्टाज के 39 घर खरीदारों को 17 करोड़ रुपये लौटाए। कोर्ट ने यह आदेश फ्लैट्स की डिलीवरी में देरी के मामले में दिया।

वापसी की इस रकम में घर खरीदारों की ओर से जमा किया गया रुपया शामिल है। कोर्ट ने कंपनी को चार हफ्तों में 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया। यूनिटेक पहले ही कोर्ट की रजिस्ट्री के पास 15 करेाड़ रुपये जमा कर चुकी है। यह कदम उसने कोर्ट के 15 अगस्त को दिए गए आदेश के अनुसार उठाया था। कोर्ट ने खरीदारों से कहा है कि वे प्रो-राटा बेसिस पर रिफंड लेना शुरू करें क्योंकि अब तक केवल 15 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं।
डिवेलपर को फटकार लगाते हुए जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताभ रॉय और जस्टिस ए एम खनविलकर की बेंच ने कहा, ‘अपील करने वाला पक्ष (यूनिटेक) फ्लैट्स को बनाने में देरी के लिए यह दलील नहीं दे सकता है कि निर्माण कार्य में वक्त लगता है।’ सुप्रीम कोर्ट ने अभी ब्याज की रकम पर निर्णय नहीं किया है। इस केस की अगली सुनवाई 11 जनवरी को होगी।
खरीदारों की ओर से ऐडवोकेट पवनश्री अग्रवाल ने कहा, ‘रिफंड मिलने से हमें खुशी है, लेकिन बायर्स चाहते थे कि कोर्ट इंट्रेस्ट अमाउंट के बारे में फैसला दे। इस पर फैसला अभी नहीं दिया गया है।’
यूनिटेक के अनुसार, रिफंड की जा रही रकम अगर प्रॉजेक्ट में लगा दी जाती तो इससे कन्ज्यूमर्स को मकान मिलने में मदद होती। यूनिटेक ने ईटी को ईमेल से दिए जवाब में कहा, ‘हाल में हमने अपनी वर्किंग कैपिटल बढ़ाई है और कई आरडब्ल्यूए के साथ प्रॉजेक्ट्स के लिए एस्क्रो अकाउंट्स बनाए हैं। कंस्ट्रक्शन करने वाले मजदूरों की संख्या पिछले कुछ महीनों में दोगुनी कर दी गई है।’
कंपनी चाहती थी कि तीन टावरों को अप्रैल 2017 तक पूरा किया जाए और उस वक्त तक कुछ बायर्स को पजेशन दे दिया जाए। हालांकि कोर्ट ने कंपनी की सभी दलीलें खारिज कर दीं। यह प्रोजेक्ट 2009 में लॉन्च किया गया था और दिसंबर 2012 तक होम बायर्स को डिलीवरी मिल जानी थी। इस प्रॉजेक्ट में घर खरीदने वाले प्रसून दुबे ने कहा, ‘इस फैसले से हमें आधा हिस्सा ही मिला है। हमें कम से कम कंपनसेशन अमाउंट तो मिले ताकि समान वैल्यू का घर अब हम खरीद सकें।’
जून 2015 में नैशनल कन्ज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने इस प्रोजेक्ट में फ्लैट्स की डिलीवरी में देर के लिए यूनिटेक पर 12 पर्सेंट पेनल्टी लगाई थी। इस फैसले को यूनिटेक ने अगस्त 2015 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अगस्त को यूनिटेक को आदेश दिया था कि वह सितंबर के अंत तक कोर्ट रजिस्ट्री के पास 15 करोड़ रुपये जमा कराए।

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