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घर या प्रॉपर्टी खरीदी है तो हो जाएं सावधान, इनकम टैक्स विभाग करेगा पूछताछ

प्रॉपर्टी खरीदने में काला धन इस्तेमाल करने वालों के बुरे दिन आने वाले हैं। अगर आपने घर या प्रॉपर्टी खरीदी है तो तैयार हो जाइए सरकार आपसे ये सवाल करने वाली है कि आपके पास इसके लिए पैसा कहां से आया? सिर्फ खरीदने वाले ही नहीं बल्कि बेचने वाले से भी पूछा जाएगा उसने ये घर कब खरीदा था और इसके लिए उसके पास पैसा कहां से आया था?

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रियल एस्टेट में काला धन खपाने के कई तरीके

बता दें कि इनकम टैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रियल एस्टेट में सबसे ज्यादा कालाधन लगा हुआ है। यहां काला धन खपाने के कई आसन तरीके हैं। लोग प्रॉपर्टी के दाम कम बताते हैं जिससे स्टांप ड्यूटी बचती है और बाकी कैश दे देते हैं। कई लोग टैक्‍स डिपार्टमेंट की नजरों से बचने के लिए अपने करीबी रिश्‍तेदारों, नौकरों और ड्राइवरों के नाम से प्रॉपट्री खरीदते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी प्रॉपर्टी का लगभग 30 फीसदी बेनामी ट्रांजेक्‍शन हो सकता है। वहीं जमीन के मामले में यह 30 फीसदी से भी अधिक बेनामी ट्रांजेक्‍शन हो सकता है।

इनकम टैक्स विभाग करेगा पूछताछ

नया इनकम टैक्स कानून आने के बाद अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट घर खरीदने वालों को नोटिस भेज कर पैसे का सोर्स पूछने वाला है, हालांकि डिपार्टमेंट पहले भी ऐसा करता रहा था। नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स बेनामी प्रॉपर्टी पर शिकंजा कसने के लिए घर बेचने और खरीदने वाले दोनों से ही पूछताछ करने की तैयारी में है।

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2020 तक आठ प्रमुख शहरों में होगी 41.56 लाख घरों की मांग, डेवलपर्स नहीं कर पाएंगे मांग के अनुरूप आपूर्ति

देश के प्रमुख आठ शहरों में घरों की मांग बहुत अधिक बढ़ने वाली है। कुशमैन एंड वेकफील्‍ड द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि शहरी क्षेत्र में घरों की मांग 2020 तक 41.56 लाख यूनिट की होगी, इसके विपरीत निजी डेवलपर्स केवल 10.23 लाख यूनिट की ही आपूर्ति कर पाने में सक्षम होंगे।

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यह आठ शहर हैं- अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर(एनसीटी, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा), हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई औश्र पुणे।

रिपोर्ट के अनुसार 2016-2020 के दौरान प्रमुख आठ शहरों में कुल मकानों की मांग लगभग 42 लाख यूनिट रहने का अनुमान है। इसके अनुसार निजी डेवलपर्स द्वारा इस दौरान निर्माणाधीन व योजनागत 10 लाख मकानों की आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है।

सबसे ज्‍यादा मांग दिल्‍ली-एनसीआर में रहेगी, यहां 2020 के अंत तक करीब 10 लाख यूनिट की मांग होगी।, यह भी अनुमान है कि सबसे ज्‍यादा मांग एलआईजी (15 लाख रुपए से कम) मकानों की होगी।, 2020 तक तकरीबन 19.8 लाख एलआईजी यूनिट की मांग का अनुमान है, इसमें प्राइवेट डेवलपर्स केवल 25,000 यूनिट की आपूर्ति करेंगे।, इसी प्रकार एमआईजी (15-70 लाख रुपए) मकानों की मांग 14.57 लाख युनिट की होगी, जबकि इसके विपरीत आपूर्ति केवल 6.47 लाख यूनिट की रहेगी।
कुल हाउसिंग आर्पू‍ति में 63 प्रतिशत हिस्‍ससा एमआईजी मकानों का ही होता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक को 3 फ्लैट बायर्स के पैसे लौटाने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रियल स्टेट की कंपनी यूनिटेक लिमिटेड से बायर्स का पैसा वापस करने को कहा है। तय समय पर पजेशन न दे पाने और रजिस्ट्री से पहले 2 करोड़ रुपए जमा कराने पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने यूनिटेक की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें कंपनी ने फाइनैंशल स्थिति का हवाला देते हुए पैसे दे पाने में असमर्थता जताई थी।

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यूनिटेक के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि अगर यूनिटेक 3 बायर्स के पैसा वापस करता है तो और बायर्स भी कंपनी से पैसा वापस मांग सकते हैं जिसे समस्या बढ़ जाएगी। सिब्बल ने कहा कि कोर्ट यह साफ करे कि इस प्रॉजेक्ट पर बायर्स का पैसा देने का आदेश कंपनी को दोबारा नहीं दिया जाएगा।

कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कंपनी को 2 करोड़ रुपए 22 दिसंबर से पहले जमा कराने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि होम बायर्स कोर्ट की रजिस्ट्री से थोड़ा-थोड़ा कर पैसा निकाल पाएंगे। कोर्ट ने कहा कि वह इस बात का फैसला बाद में करेगा कि इंट्रेस्ट रेट और नुकसान भरपाई के लिए बायर्स को कितना पैसा देना होगा।

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नोटबंदी से जमा रकम को सस्ते होम लोन के तौर पर बांटेगी मोदी सरकार

नोटबंदी के बाद भले ही विश्लेषक हाउसिंग सेक्टर की ग्रोथ में गिरावट का अनुमान लगा रहे हों, लेकिन मोदी सरकार ने इसे रफ्तार देने के लिए एक योजना तैयार की है। इकनॉमिक टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक डीमॉनेटाइजेशन से जुटाई गई रकम को नरेंद्र मोदी सरकार सस्ते होम लोन के तौर पर बांटने पर विचार कर रही है।

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इस स्कीम को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक के बीच बातचीत चल रही है। रिपोर्ट के अनुसार यह स्कीम 2017 के आम बजट से ठीक पहले घोषित की जा सकती है। माना जा रहा है कि इस साल आम बजट फरवरी के पहले सप्ताह में ही पेश किया जा सकता है।

इस स्कीम का पूरा खाका नोटबंदी के बाद जमा होने वाली राशि के आकलन के बाद तैयार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार की नजर इस बात पर है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा होने वाली रकम को सस्ते होम लोन के तौर पर बांटा जाए। सरकार इस स्कीम के तहत 50 लाख रुपये तक के होम लोन 6 से 7 पर्सेंट की ब्याज दर पर देने की योजना बना रही है। सस्ते होम लोन का तोहफा उन लोगों को दिया जाएगा, जिन्होंने पहले घर के लिए लोन न लिया हो। इसके जरिए सरकार अधिक से अधिक लोगों को घर मुहैया कराने के लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहती है। यही नहीं इस स्कीम से मंदी की मार झेल रहे प्रॉपर्टी सेक्टर को भी गति मिल सकेगी।

बीते कुछ वक्त से रीयल एस्टेट सेक्टर मंदी के हालात से गुजर रहा है। 8 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद किए जाने के ऐलान के बाद हालत और खस्ता होने की आशंका है। हालांकि यह बात भी कही जाती रही है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में बड़े पैमाने पर कैश पहुंचने के बाद बैंकों की ओर से लोन की दरों में कटौती की जा सकती है।

भले ही कुछ रेटिंग एजेंसियों और एनालिस्ट्स ने नोटबंदी के फैसले को प्रॉपर्टी सेक्टर के लिए नुकसानदायक करार दिया हो, लेकिन इंडस्ट्री के कुछ एक्सपर्ट्स ने इसका स्वागत भी किया है। इनका कहना है कि नोटबंदी के फैसले से इंडस्ट्री में पारदर्शिता आएगी और लंबे वक्त में इससे स्थिरता का माहौल बनेगा।

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पुराने नोटों से बनेंगी ईंटें-फाइल कवर, 13 साल पहले हुई थी शुरुआत

चलन से बाहर हो चुके 500-1000 रुपए के नोटों से ईंट, फाइल कवर और टी-कोस्टर तैयार किए जाएंगे। आरबीआई 2,300 करोड़ नोटों को नष्ट करेगी। देश में पुराने नोटों को खत्म करने की शुरुआत करीब 13 साल पहले हुई थी। इसके लिए देशभर में 19 सेंटर बनाए गए हैं। नोटों को रिसाइकल करने के लिए लगीं 27 मॉडर्न मशीनें…

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- 2003 में उस वक्त के रिजर्व बैंक के गवर्नर बिमल जालान ने पुराने-बेकार नोट खत्म करने की शुरुआत की थी।

- इसके लिए ‘करेंसी वेरिफिकेशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम (सीवीपीएस) लॉन्च किया गया था।

- इसके तहत देशभर में 19 जगहों पर पुराने नोटों को खत्म करने के लिए सेंटर बनाए गए।

- हर सेंटर 1 घंटे में 60,000 पुराने नोट खत्म करके इन्हें ईंटों में बदल सकता है।

- यहां पुराने नोट रिसाइकल करके इनसे नए नोट के लिए कागज भी तैयार किया जाता है।

- आरबीआई के इन 19 सेंटर्स पर इस काम के लिए 27 मॉर्डन मशीनें लगी हैं।

ऐसे खत्म होते हैं पुराने नोट

- आरबीआई मशीनों से नोटों को कागज के बारीक टुकड़ों में बदलता है।

- दूसरी मशीन इन टुकड़ों को ईंटों में बदल देती है।

- फिर आरबीआई इन ईंटों को इंडस्ट्रियल यूज के लिए बेच देता है।

- इन ईंटों का इस्तेमाल गड्ढे भरने और सड़कें बनाने में भी होता है।

2 साल में 3,040 करोड़ नोट खत्म कर चुका है आरबीआई

- इस फाइनेंशियल ईयर में आरबीआई को 2,300 करोड़ खराब नोट खत्म करना है।

- 2015-16 में देश में 1,640 करोड़ खराब नोट खत्म किए गए थे।

- 2012-13 में देश में 1,400 करोड़ खराब नोट खत्म किए गए थे।

नोट छापने-खपत में भारत दूसरे नंबर पर

- देश में मार्च 2015 तक 9,000 करोड़ से ज्यादा नोट चलन में थे।

- 28 अक्टूबर तक 17.77 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट चलन में थे।

- आरबीआई नए नोटों की छपाई पर 2,700 करोड़ रुपए सालाना खर्च करता है।

- देश में पैसों का लेनदेन 98% नगदी में होता है।

दुनिया में क्या होता है पुराने नोटों का

- 1990 तक बैंक ऑफ इंग्लैंड पुराने नोट जलाकर अपनी इमारतें गर्म रखता था। 2000 के बाद से इंग्लैंड में इनसे खाद तैयार की जाती है।

- अमेरिका में सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व पुराने नोटों को बारीक टुकड़ों में काटकर इन्हें आर्टिस्टिक और दूसरे इस्तेमाल के लिए सौंप देता है।

- 2012 में हंगरी के सेंट्रल बैंक ने पुराने नोट जलाए थे, ताकि गरीब लोग सर्दी से बच सकें। इसके बाद ईंटें बनाकर इन्हें ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स को दिया गया।

बैंकों में पहुंचे 6 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट

- नोटबंदी के बाद से बैंकों में करीब 6 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट जमा हो चुके हैं।

- सरकार को 30 दिसंबर तक 10-15 लाख करोड़ रुपए के नोट जमा होने की उम्मीद है।

- बैंकों में इतनी बड़ी मात्रा में रकम जमा होने से लोन सस्ते होने की उम्मीद जागी है।

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मनोहरलाल खट्टर ने कहा अपनी जरुरत का पानी भी दिल्ली को दे देता है हरियाणा के सीएम

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा है कि हरियाणा दिल्ली को बहुत ज्यादा पानी दे रहा है जबकि हरियाणा की पानी की जरुरतें ज्यादा हैं. उन्होनें कहा की पानी को राष्ट्रीय संपदा बनाया जाए यह किसी एक प्रदेश तक सीमित नहीं होना चाहिए.

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मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि दिल्ली को पानी देने से हरियाणा में पानी की कमी हो गई है इसलिए दिल्ली को बाकी राज्य भी पानी दें. उन्होनें कहा कि हरियाणा कि जनता दूर-दूर से पानी लाती है तब भी उसकी पानी की जरुरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं और हरियाणा के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. उन्होनें कहा कि पानी की जरुरतों को देखते हुए दिल्ली को खुद ही पानी के श्रोत खोजने चाहिए.

सीएम ने कहा की मेरे दो वर्ष के कार्यकाल में हरियाणा में बहुत बदलाव आया है और हमारी शासन व्यवस्था पारदर्शी है. उन्होनें कहा कि पहले दिल्ली की जनसंख्या कम थी लेकिन आबादी बढ जाने के कारण दिल्ली की पानी की जरुरतें काफी बढ गई हैं और अब हरियाणा दिल्ली को इतना पानी दे पाने में समर्थ नहीं है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा है कि हरियाणा दिल्ली को बहुत ज्यादा पानी दे रहा है जबकि हरियाणा की पानी की जरुरतें ज्यादा हैं. उन्होनें कहा की पानी को राष्ट्रीय संपदा बनाया जाए यह किसी एक प्रदेश तक सीमित नहीं होना चाहिए.

मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि दिल्ली को पानी देने से हरियाणा में पानी की कमी हो गई है इसलिए दिल्ली को बाकी राज्य भी पानी दें. उन्होनें कहा कि हरियाणा कि जनता दूर-दूर से पानी लाती है तब भी उसकी पानी की जरुरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं और हरियाणा के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. उन्होनें कहा कि पानी की जरुरतों को देखते हुए दिल्ली को खुद ही पानी के श्रोत खोजने चाहिए.

सीएम ने कहा की मेरे दो वर्ष के कार्यकाल में हरियाणा में बहुत बदलाव आया है और हमारी शासन व्यवस्था पारदर्शी है. उन्होनें कहा कि पहले दिल्ली की जनसंख्या कम थी लेकिन आबादी बढ जाने के कारण दिल्ली की पानी की जरुरतें काफी बढ गई हैं और अब हरियाणा दिल्ली को इतना पानी दे पाने में समर्थ नहीं है.

उन्होनें बताया कि सतलज यमुना लिंक (SYL) के मुद्दे पर राज्य का एक सर्वदलीय शिष्टमंडल 28 नवंबर को राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने हमेशा दिल्ली को पानी दिया है लेकिन अब वह दिल्ली को उतना पानी नहीं दे पाएगा जितना पहले देता

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Rs 40 crore from property impose in 10 days

The three civil partnerships have gathered over Rs 40 crore from property duty and change charge in the previous ten days after the community bodies declared that they will acknowledge old money notes till November 24.

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A senior authority said this has never happened in the past and the weight of demonetisation has helped the urban bodies get the genuinely necessary money related support. “Last monetary year, we had accomplished our objective of gathering Rs 650 crore and amid this year, we are expecting more than Rs 720 crores as of now,” he said.

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All property records only a tick away

Every one of the one needs to do now to check the status of a property registration is to visit the site of Delhi government’s income office. An e-pursuit will uncover the status of the property, as well as the reports identified with it, including deal deed, home loan and rent deed. Starting on Tuesday, properties enrolled over the 21 sub-enlistment office workplaces in Delhi are being made accessible on the web.

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The online framework will have information for all properties that fall under the urban peripheries of the capital, including all states and plotted settlements to which the urban property enrolment framework applies. While the advance in internet overhauling among the 21 sub-enlistment offices workplaces presently shifts, they will in the long run have continuous information and in addition data going back to in any event around two years. Many as of now have information from as far back as 2002, sources said.

Implied mostly to check deceitful enrolment of properties and in addition to forestall altering of records by income field functionaries, the digitisation will likewise guarantee speedy access to data. The income office is currently dealing with offering out the procedure for facilitating the transferring of legacy information to guarantee following of old properties also.

The greatest recipient will be the normal man, who will no longer need to raced to the sub-recorder office to check the enrolment status of a potential property buy. “When you have the enlistment number, you can check the status on the web,” said an authority. “Regardless of the possibility that the enrolment number is inaccessible, an inquiry alternative permits anybody access to data on enlistments did at a specific sub-recorder office in a particular zone in a specific year.”

A drop-down box on the site will demonstrate the related status of archives like deal deed, rent deed and home loan papers. The whole documentation won’t be accessible, however individuals will now be in a position to see the status of the property records and afterward apply to the sub-recorder for duplicates.

Recently, had reported how records of properties on khasras in provincial towns of Delhi, aside from in north locale towns and those under solidification or where records were damaged, had been digitized, with computerized marks rendering these legitimately substantial. The usage started from Tuesday. The records of north area will likewise be accessible in computerize organize soon. A sum of 33,458 khatas (records) in 109 provincial towns have been digitized as such.

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आशियाने का सपना होगा पूरा? कम होगी प्रॉपर्टी की कीमत

हर शहरी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो, लेकिन रीयल स्टेट की ऊंची कीमतें उसे किराये के घर में रहने पर मजबूत करती हैं। हालांकि, हाल में हुई कुछ घटनाओं के बाद परिस्थिति तेजी से बदल रही है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में आम आदमी भी आशियाने का सपना पूरा कर सकता है।

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सरकार ने पिछले दिनों 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर ब्लैक मनी जमा करने वालों को करारा झटका दिया। इससे देश के कई हिस्सों में प्रॉपर्टी के कीमत में गिरावट आने की उम्मीद है। जानकारों के मुताबिक, रीयल स्टेट में ब्लैक मनी का बहुत इस्तेमाल होता रहा है। बहुत से डिवेलपर्स और विक्रेता घर खरीदने वालों से कीमत का एक बड़ा हिस्सा कैश में लेते हैं।

बताया जा रहा है कि 500 और 1000 के नोट बंद होने से इस “खेल” पर लगाम लगेगा। इस कदम का दूसरा असर यह होगा कि बैंकों में अत्यधिक कैश जमा होने की वजह से ब्याज दरें नीचे आएंगी और ईएमआई में राहत मिलेगी। इसके अलावा कई डिवेलपर्स अफोर्डबल हाउसिंग सेगमेंट पर फोकस कर रहे हैं। यह ऐसे लोगों के लिए सुनहरा मौका है, जिन्हें मेट्रो सिटीज में अपना घर पाना कठिन लगता है।

इन चीजों के अलावा कई राज्य रीयल स्टेट रेग्युलेटरी ऐक्ट को खरीदारों का हितैषी बना रहे हैं। अब खरीदारों को अधिक पारदर्शिता मिलेगी। इसके साथ ही प्रॉजेक्ट की देरी और अन्य ऐसी गतिविधियों बंद होंगी, जिनकी वजह से खरीदार परेशान होते हैं।

जेएलएल इंडिया, रेसिडेंशल सर्विसेस के सीईओ अशविंदर राज सिंह कहते हैं, ‘नोटबंदी का असर रीयल स्टेट सेक्टर पर जरूर पड़ेगा, क्योंकि इसमें ब्लैक मनी और कैश ट्रांजैक्शन बड़े पैमाने पर शामिल रहा है। हालांकि, यह सब चीजें सेकेंडरी सेल्स मार्केट में अधिक होती हैं। देश के आठ बड़े शहरों में विश्वसनीय और प्रतिष्ठित डिवेलपर्स के प्रॉजेक्ट्स पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि जो खरीदार ऐसे प्रॉजेक्ट्स में निवेश करते हैं वे होम लोन का सहारा लेते हैं और लेनदेन कानूनी चैनल से होता है।’

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ब्लैक मनी पर रोक से प्रॉपर्टी सौदों पर लगा ब्रेक

सरकार के ब्लैक मनी पर अंकुश लगाने से आमतौर पर बड़े पैमाने पर बेनामी रकम के सहारे होने वाले प्रॉपर्टी सौंदों पर रोक लगती दिख रही है। डायरेक्ट लैंड ट्रांजैक्शंस में सुस्ती के बीच ज्वाइंट वेंचर (जेवी), ज्वाइंट डिवेलपमेंट (जेडी) या कॉरपोरेट लैंड डिसइनवेस्टमेंट पर पुराने नोट हटाने का ज्यादा असर नहीं होगा।

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जेएलएल इंडिया के चेयरमैन और कंट्री हेड अनुज पुरी ने कहा कि जेवी, जेडी और कॉरपोरेट डाइवेस्टमेंट ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में होते हैं। ऐसे सौदों में कैश का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता या बेहद कम इस्तेमाल होता है। जो लोग डायरेक्ट लैंड डील कर रहे हैं, उन्हें नोटबंदी से दिक्कत होगी। खासतौर पर कृषि भूमि के सौदों में। इसमें बड़े पैमाने पर कैश की जरूरत होती है। अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में ज्यादातर लैंड डील्स में 10 से 40 फीसदी कैश कंपोनेंट रहता है। नोटबंदी के बाद अभी जिन सौदों को लेकर बातचीत चल रही है या भविष्य में होने वाले सौदों में अधिक समय लगेगा।

लैंड ट्रांजैक्शंस में सुस्ती या इनके रुकने से कई बिल्डरों को कैश की कमी हो सकती है। इससे उन्हें कम रेट्स पर जमीन बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। डिवेलपर्स पहले ही नए प्रोजेक्ट्स के लिए एकमुश्त जमीन की खरीदारी से बच रहे हैं ताकि फंड ब्लॉक न हो। पिछले कुछ सालों से सुस्ती के बीच डिवेलपर्स स्ट्रैटेजिक इनवेस्टर्स और दूसरे डिवेलपर्स के साथ ज्वाइंट वेंचर बना रहे हैं।

इस तरह के जेवी न केवल इस फाइनेंशियल मुश्किल के वक्त कैपिटल जुटाने की कोशिश में रफ्तार दे रहे हैं, साथ ही इससे इनके रिसोर्सेज भी पूल हो रहे हैं और इनकी विशेषज्ञता का भी लाभ एक-दूसरे को मिल रहा है। कन्फ्यूजन की वजह से कॉरपोरेट लैंड डाइवेस्टमेंट और ज्वाइंट वेंचर्स सौदों पर भी ब्रेक लगने का डर है। इस तरह की डील में अभी ज्यादा समय लगेगा।

सीबीआरई के इंडिया और साउथ ईस्ट एशिया के चेयरमैन अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘निसंदेह लैंड डील्स में कमी आएगी। हालांकि, यह टेंपररी घटनाक्रम होगा क्योंकि इकनॉमी बढ़ रही है। इसलिए डिवेलपमेंट की खातिर जमीन की मांग बढ़ रही है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में सबसे ज्यादा चोट पड़ेगी क्योंकि ज्यादातर स्पेकुलेटिव इनवेस्टमेंट पहले ही हो चुके हैं।’

टाउनशिप या इंडस्ट्रियल सेट अप की खरीदारी पर काम करने वाले लैंड एग्रीगेटर्स को अपने कदमों को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है क्योंकि इसमें काफी बड़ा कैश कंपोनेंट जुड़ा होता है। सेंचुरी रियल एस्टेट होल्डिंग्स के एमडी रविंद्र पाई ने कहा, ‘बड़े लैंड पार्सल्स के लिए न के बराबर बायर्स हैं। ज्वाइंट डिवेलपमेंट मॉडल्स कुछ लिक्विडिटी ला रहे हैं। इससे बिल्डर्स को कंस्ट्रक्शन फंडिंग पर फोकस करने में मदद मिल रही है, जो लैंड एक्विजिशन के मुकाबले सस्ती है।’

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