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ब्लैक मनी पर रोक से प्रॉपर्टी सौदों पर लगा ब्रेक

सरकार के ब्लैक मनी पर अंकुश लगाने से आमतौर पर बड़े पैमाने पर बेनामी रकम के सहारे होने वाले प्रॉपर्टी सौंदों पर रोक लगती दिख रही है। डायरेक्ट लैंड ट्रांजैक्शंस में सुस्ती के बीच ज्वाइंट वेंचर (जेवी), ज्वाइंट डिवेलपमेंट (जेडी) या कॉरपोरेट लैंड डिसइनवेस्टमेंट पर पुराने नोट हटाने का ज्यादा असर नहीं होगा।

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जेएलएल इंडिया के चेयरमैन और कंट्री हेड अनुज पुरी ने कहा कि जेवी, जेडी और कॉरपोरेट डाइवेस्टमेंट ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में होते हैं। ऐसे सौदों में कैश का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता या बेहद कम इस्तेमाल होता है। जो लोग डायरेक्ट लैंड डील कर रहे हैं, उन्हें नोटबंदी से दिक्कत होगी। खासतौर पर कृषि भूमि के सौदों में। इसमें बड़े पैमाने पर कैश की जरूरत होती है। अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में ज्यादातर लैंड डील्स में 10 से 40 फीसदी कैश कंपोनेंट रहता है। नोटबंदी के बाद अभी जिन सौदों को लेकर बातचीत चल रही है या भविष्य में होने वाले सौदों में अधिक समय लगेगा।

लैंड ट्रांजैक्शंस में सुस्ती या इनके रुकने से कई बिल्डरों को कैश की कमी हो सकती है। इससे उन्हें कम रेट्स पर जमीन बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। डिवेलपर्स पहले ही नए प्रोजेक्ट्स के लिए एकमुश्त जमीन की खरीदारी से बच रहे हैं ताकि फंड ब्लॉक न हो। पिछले कुछ सालों से सुस्ती के बीच डिवेलपर्स स्ट्रैटेजिक इनवेस्टर्स और दूसरे डिवेलपर्स के साथ ज्वाइंट वेंचर बना रहे हैं।

इस तरह के जेवी न केवल इस फाइनेंशियल मुश्किल के वक्त कैपिटल जुटाने की कोशिश में रफ्तार दे रहे हैं, साथ ही इससे इनके रिसोर्सेज भी पूल हो रहे हैं और इनकी विशेषज्ञता का भी लाभ एक-दूसरे को मिल रहा है। कन्फ्यूजन की वजह से कॉरपोरेट लैंड डाइवेस्टमेंट और ज्वाइंट वेंचर्स सौदों पर भी ब्रेक लगने का डर है। इस तरह की डील में अभी ज्यादा समय लगेगा।

सीबीआरई के इंडिया और साउथ ईस्ट एशिया के चेयरमैन अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘निसंदेह लैंड डील्स में कमी आएगी। हालांकि, यह टेंपररी घटनाक्रम होगा क्योंकि इकनॉमी बढ़ रही है। इसलिए डिवेलपमेंट की खातिर जमीन की मांग बढ़ रही है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में सबसे ज्यादा चोट पड़ेगी क्योंकि ज्यादातर स्पेकुलेटिव इनवेस्टमेंट पहले ही हो चुके हैं।’

टाउनशिप या इंडस्ट्रियल सेट अप की खरीदारी पर काम करने वाले लैंड एग्रीगेटर्स को अपने कदमों को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है क्योंकि इसमें काफी बड़ा कैश कंपोनेंट जुड़ा होता है। सेंचुरी रियल एस्टेट होल्डिंग्स के एमडी रविंद्र पाई ने कहा, ‘बड़े लैंड पार्सल्स के लिए न के बराबर बायर्स हैं। ज्वाइंट डिवेलपमेंट मॉडल्स कुछ लिक्विडिटी ला रहे हैं। इससे बिल्डर्स को कंस्ट्रक्शन फंडिंग पर फोकस करने में मदद मिल रही है, जो लैंड एक्विजिशन के मुकाबले सस्ती है।’

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30% सस्ता घर-मोदी का ये कदम आपको देगा बड़ा फायदा, जानिए कैसे होगा असर

500-1000 के नोट पर बैन के रूप में ब्लैक मनी पर मोदी का मास्टर स्ट्रोक घर-दुकान आदि प्रॉपर्टी खरीदने वाले आम आदमी के लिए अच्छे दिन लाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रियल एस्टेट इंडस्ट्री में 50 से 80 फीसदी तक लेनदेन ब्लैक मनी के रूप में होता है। ऐसे में भले ही बिल्डरों के लिए यह कड़वा घूंट है, लेकिन प्रॉपर्टी के 30 फीसदी तक सस्ता होने की उम्मीद से आम आदमी को अभूतपूर्व राहत मिल सकती है। साथ ही ‘सबके लिए घर’ का राष्ट्रीय सपना भी अब तेजी से हकीकत में तब्दील होता नजर आएगा।

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अभी भी आप यहां चला सकते हैं 500 और 1000 के नोट

ऐसे गिरेंगे रेट करंसी डिमोनेटाइजेशन से रियल स्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। इस कदम से प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में निवेशक रियल स्टेट में पैसा नहीं लगा पाएंगे और पहले से संकटग्रस्त स्थिति से जूझ रहे बिल्डर्स को मजबूरन प्रॉपर्टी के रेट्स गिराने होंगे। सबसे अधिक ब्लैक लेन-देन के चलते दिल्ली-एनसीआर में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी अच्छा असर दिखेगा।

एक्सपर्ट व्यू

रियल्टी बिजनेस से जुड़े लोग हालांकि इस कड़वी घूंट को पीने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन कहीं ना कहीं दबी जुबान में कीमतों में गिरावट के संकेत जरूर दे रहे हैं।

‘फायदा मिलेगा पर धीरे-धीरे’

प्रॉप टाइगर डॉट कॉम के सीईओ ध्रुव अग्रवाल कहते हैं, ‘कीमतों में तत्काल किसी गिरावट के आसार नहीं हैं, लेकिन ट्रांजैक्शन पर बड़ा असर जरूर पड़ेगा। जिन डेवलपर्स के पास बड़ी मात्रा में अनसोल्ड प्रॉपर्टी है, उनके लिए बड़ा संकट होगा और अंततः उन्हें रेट घटाने पड़ेंगे।’

‘अभी आफत, बाद में राहत’एसएआरई होम्स के एमडी विनीत रेलिया का मानना है कि करंसी डिमोनेटाइजेशन और रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट मिलकर फिलहाल भले ही लंबी अवधि में सेक्टर के लिए सकारात्मक ही साबित होंगे। इससे कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हाई वैल्यू सेग्मेंट में ज्यादा असर की संभावना है।

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रियल स्टेट पर पड़ेगा असर, प्रॉपर्टी रेट्स में आ सकती है गिरावट

ब्लैक मनी को खत्म करने के लिए 500 और 1000 के नोटों का किया गया मोनेटाइजेशन का सबसे ज्यादा प्रभाव रियल्टी और गोल्ड सेक्टर पर पड़ेगा। साथ ही डिजिटल पेमेंट्स कंपनियों में हिस्सेदारी रखने वालों की चांदी होगी। रियल्टी सेक्टर पर पड़ने वाले सबसे अधिक असर से प्रॉपर्टी के रेट्स गिर सकते हैं।

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रियल स्टेट में ब्लैक मनी का काफी इस्तेमाल होता है। 500 और 100 के नोट्स के डिमोनेटाइजेशन के बाद रियल स्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। इस कदम से प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में निवेशक रियल स्टेट में पैसा नहीं लगा पाएंगे और बिल्डर्स को मजबूरन प्रॉपर्टी के रेट्स गिराने होंगे। दिल्ली-एनसीआर में इस का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा क्योंकि यह मार्केट कैश में कारोबार के लिए जाना जाता है।

कितनी होगी गिरावट
ऐस्टेट एजेंट्स असोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट यशवंत दलाल के अनुसार, ‘प्रॉपर्टी मार्केट्स में 30 प्रतिशत के करेक्शन की उम्मीद है। मार्केट्स कंडीशन्स को देखते हुए ऐसे बिल्डर्स को भी रेट्स घटाने होंगे जो चेक से पेमेंट लेते हैं। दिल्ली-एनसीआर के अलावा छोटे शहरों के प्रॉपर्टी रेट्स पर भी इसका काफी असर पड़ेगा।’

इसके अलावा प्रॉजेक्ट्स में देरी की भी समस्या आएगी। निवेश न होने की स्थिति में बिल्डर्स निमार्ण कार्य की गति कम कर देंगे। डीएलएफ के सीईओ राजीव तलवार का मानना है कि सरकार के इस कदम के बाद से रियल्टी सेक्टर ज्यादा पारदर्शी हो जाएगा।

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